RTI Ranking: मनमोहन सरकार में नंबर 2 पर था भारत, मोदी राज में 6 पर लुढ़का

RTI Ranking Manmohan Singh Vs. Modi
RTI Ranking Manmohan Singh Vs. Modi

RTI Ratings Introduction

सुचना का अधिकार जिसे भारत के लोकतंत्र को मजबूत करने की ओर सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा था, की स्थिति ख़राब होती मालूम पड़ती है। मोदी सरकार के राज में सुचना का अधिकार रैंकिंग में भारत ने अपना दूसरा स्थान खो दिया है।

123 देशों की रैंकिंग में भारत अब पहले के मुक़ाबले छठे स्थान पर खिसक गया है। वही भारत मनमोहन यानि कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2011 में ये दूसरे स्थान पर था।

साल 2011 में ही सुचना के अधिकार पर ग्लोबल रैंकिंग की शुरुआत की गयी थी। रैंकिंग को शुरू करने का एक मक़सद ये भी था ताकि सभी देशो के पास बेहतर ओर बत्तर होती स्थिति की ओर ध्यान रहे ओर वो अपने आने वाली पॉलिसीस में सुधर कर सके। मानवाधिकारों पर काम करने वाली एक विदेशी गैर-सरकारी संस्था एक्सेस इन्फो यूरोप और सेंटर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी का यह सयुंक्त प्रोजेक्ट है।

इस प्रोजेक्ट के तहत 123 देशो में चल रहे सुचना एक अधिकार पर चर्चा की जाती है उनमे विपत कमजोरियों और खूबियों को ढूंढ कर बाकि देशो के सामने रख सके। फिर इकट्ठे किये गए डाटा से ही एक वैश्विक लिस्ट जारी की जाती है जिससे बेहतर से बत्तर स्थिति वाले देशो को रखा जाता है

यानि जो बेहतर वो सबसे ऊपर और उससे कम बेहतर उससे नीचे, इस प्रकार से उन्हें रैंक किया जाता है।

यहाँ ये जानना भी जरुरी हो जाता है की इस लिस्ट को तैयार करने में 150 पॉइंट स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत लगभग ६१ इंडीकेटर्स को 7 फैक्टर्स में बाँट कर सुचना के अधिकार से जुडी सुविधाओं की स्थिति का परिक्षण कर तब बनाई जाती है ये लिस्ट।

अगर भारत की बात करे तो, संस्थाओ ने इस लिस्ट में सुचना के अधिकार तक पहुंचने की सुविधा, दायरा, अनुरोध प्रक्रिया, अपवाद और इंकार, अपील, अनुमोदन और सुरक्षा, और अंततः सुचना के अधिकार का प्रचार तंत्र जैसे मानकों को रखा है। इन मानकों पर रिसर्च कर भारत में सुचना के अधिकार की स्थिति का अनुमान लगाया गया है।

भारत की एक संस्था के द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट के तहत साल 2017 में भारत में 66.6 लाख आवेदन प्राप्त हुए। इनमे से करीब ७ प्रतिशत आवेदनों को ख़ारिज कर दिया गया यानि लगभग 5 लाख आवेदन।


बात यही ख़तम नहीं हुए, लगभग 18 लाख आवेदन अपील के लिए सीआईसी पहुंचे। इसी दौरान सीआईसी से आवेदकों की अपील पर लगभग २ करोड़ रुपये का जुरमाना भी ठोक दिया है।

ट्रांसपेरेंसी इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में केवल 10 राज्यों ने ही इससे जुडी जानकारी पब्लिक की है। वार्षिक रिपोर्ट जारी करना सभी राज्यों के लिए अनिवार्य है परन्तु लगता है इन राज्यों को अनिवार्यता का अर्थ नहीं पता। ट्रांसपेरेंसी इंडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में केवल १२ राज्यों में सुचना के अधिकार विभाग में कोई पद खली नहीं है बाकि सभी राज्य वर्कफोर्स शोर्तज से भी जूझ रहे है

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है की भारत में कुल सुचना आयोग में लगभग 30 प्रतिशत पद खाली है यानि स्वीकृत 156 पद में 48 पद खाली है।

एक्सेस इन्फो यूरोप और सेंटर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी की रिपोर्ट के मुताबिक साल २०११, २०१२, २०१३ की ग्लोबल रेटिंग में भारत दूसरे पायदान पर व्यवस्थित था परन्तु उसके बाद के वर्षों में भारत लगतार अपने पायदान से नीचे लुढ़का है।

भारत आज श्रीलंका, मेक्सिको, अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों से भी पीछे जा चूका है।


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